टोरंटो के नए अपार्टमेंट की चाबी हाथ में है, सामान के डिब्बे लिफ़्ट में चढ़ रहे हैं, और फ़ोन पर माँ कह रही हैं — "बेटा, बिना गृह प्रवेश के घर में मत रहना।" पर शहर के मंदिर के पंडित जी अगले तीन हफ़्ते व्यस्त हैं। भारत में भी यही हाल होता है — मुहूर्त वाले दिन पंडित मिलना मुश्किल, और किराए के छोटे फ़्लैट के लिए बड़ी पूजा का ख़र्च अलग।
तो सवाल यह है: क्या बिना पंडित के गृह प्रवेश हो सकता है? घर पर ख़ुद कैसे करें, कौन-सी सामग्री लगेगी, दूध क्यों उबालते हैं, और किराए के घर में क्या करें?
इसका जवाब ढूँढते हुए मुझे गृह प्रवेश की सबसे पुरानी लिखित विधियों में से एक मिली — और उसमें घर में प्रवेश का मंत्र पंडित नहीं, घर का मालिक ख़ुद बोलता है। वह वचन इतना सुंदर है कि आप उसे अपने गृह प्रवेश में दोहराना चाहेंगी। वह आगे है।
क्या बिना पंडित के गृह प्रवेश कर सकते हैं? — सीधा जवाब
हाँ। पारस्कर गृह्यसूत्र (कांड 3, कंडिका 4) के प्रामाणिक अनुवाद में नए घर में प्रवेश की जो विधि है, उसमें अग्नि में आहुति, अन्न का अर्पण और घर में प्रवेश — तीनों गृहस्थ स्वयं करता है। ब्राह्मण (पुरोहित) उसमें केवल पास बैठता है और प्रवेश की अनुमति देता है (अनुवाद: Hermann Oldenberg, साभार: sacred-texts.com)। पूरी "वास्तु शांति" एक अलग और लंबा अनुष्ठान है, जिसके लिए परिवार अक्सर पुरोहित बुलाते हैं — पर सादा गृह प्रवेश आप अपने परिवार के साथ ख़ुद कर सकती हैं।
बिना पंडित के गृह प्रवेश — एक नज़र में:
- घर की पूरी सफ़ाई, द्वार पर आम के पत्तों और गेंदे का तोरण, देहरी पर रंगोली।
- पति-पत्नी (या परिवार का मुखिया) जल से भरा कलश और दीपक लेकर दाहिनी ओर से घर में प्रवेश करें।
- उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में चौकी पर कलश, गणेश जी का चित्र और दीपक रखें; गणेश पूजन करें।
- आम के पत्ते से पूरे घर में जल छिड़कें।
- छोटा हवन करें — या जहाँ अग्नि की अनुमति नहीं, वहाँ केवल घी का दीपक।
- नई रसोई में पहले दूध उबालें, खीर या मीठा बनाएँ, भगवान को भोग लगाएँ।
- प्रसाद परिवार, मेहमानों और पड़ोसियों में बाँटें।
गृह प्रवेश क्या है और इसके कितने प्रकार हैं?
गृह प्रवेश नए घर में रहने से पहले की पूजा है — घर को शुद्ध करने, समृद्धि का आवाहन करने और घर में रहने वालों के लिए आशीर्वाद माँगने की रस्म। Wikipedia के Grihapravesha पन्ने पर वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके तीन प्रकार बताए गए हैं (साभार: Wikipedia, Grihapravesha):
| प्रकार | कब |
|---|---|
| अपूर्व | नए बने घर में पहली बार प्रवेश |
| सपूर्व | बाहर देश से लौटकर अपने घर में फिर से प्रवेश |
| द्वंद्व | मरम्मत या पुनर्निर्माण के बाद घर में प्रवेश |
ध्यान दीजिए — दूसरा प्रकार ही उन परिवारों के लिए है जो बरसों भारत से बाहर रहकर अपने पुराने घर लौटते हैं। किराए का घर इन तीनों में अलग से नहीं गिना गया; पर आज ज़्यादातर परिवार किराए के घर में भी सादा गृह प्रवेश करते हैं, और उसका तरीक़ा नीचे अलग दिया है।
ग्रंथ में गृह प्रवेश कैसे होता है? — पारस्कर गृह्यसूत्र की विधि
गृह्यसूत्र वे वैदिक ग्रंथ हैं जिनमें घर-गृहस्थी के संस्कारों की विधियाँ हैं। पारस्कर गृह्यसूत्र के तीसरे कांड की चौथी कंडिका घर बनाने और उसमें प्रवेश के बारे में है। मैंने इसके अंग्रेज़ी अनुवाद से मिलान किया — क्रम संक्षेप में यह है:
- घर के भीतर अग्नि स्थापित की जाती है; ब्रह्मा (पुरोहित) अग्नि के दक्षिण में बैठते हैं, और उत्तर में जल से भरा पात्र रखा जाता है (3.4.5)।
- गृहस्थ बाहर जाकर द्वार पर खड़ा होता है और कहता है — "मैं प्रवेश करता हूँ।" अनुमति मिलने पर वह यह वचन बोलते हुए भीतर आता है (3.4.6):
"To right I advance, to luck I advance!"
— "मैं दाहिनी ओर बढ़ता हूँ, मैं सौभाग्य की ओर बढ़ता हूँ!"
— पारस्कर गृह्यसूत्र 3.4.6, अनुवाद: Hermann Oldenberg (साभार: sacred-texts.com) — हिंदी भाव मेरा
- घी की दो आहुतियाँ, और वास्तोष्पति (घर के रक्षक देवता) से चार प्रार्थनाएँ — रक्षा, सुखद प्रवेश और गायों-घोड़ों जैसे धन की वृद्धि के लिए (3.4.7)।
- पका हुआ अन्न अग्नि, इंद्र, बृहस्पति, सरस्वती और दूसरे देवताओं को अर्पित किया जाता है, हर बार यह प्रार्थना — "मुझे रहने का स्थान दो" (3.4.8)।
- पीतल के पात्र में उदुंबर (गूलर) के पत्ते, हरी दूब, गोबर, दही, शहद, घी, कुशा और जौ मिलाकर आसनों और स्थानों पर छिड़का जाता है (3.4.9)।
- घर के चारों कोनों के खंभों को छूकर आशीर्वचन, और चारों दिशाओं की पूजा (3.4.10–17)।
- घर पूरा होने पर प्रवेश का वचन, और अंत में ब्राह्मणों को भोजन (3.4.18–19)।
प्रवेश का वह वचन, जिसका वादा किया था:
"Indra's house is wealthy, protecting; that I enter with my children, with my cattle, with everything that is mine."
— "इंद्र का यह घर समृद्ध है, रक्षा करने वाला है; मैं इसमें अपनी संतान के साथ, अपने पशुओं के साथ, और जो कुछ भी मेरा है उन सबके साथ प्रवेश करता हूँ।"
— पारस्कर गृह्यसूत्र 3.4.18, अनुवाद: Hermann Oldenberg (साभार: sacred-texts.com) — हिंदी भाव मेरा
इस विधि से तीन बातें साफ़ होती हैं। पहली — आहुति और प्रवेश गृहस्थ का काम है। दूसरी — "दाहिना पैर पहले रखें" वाली आम मान्यता के सबसे क़रीब यही वचन है, पर अनुवाद में पैर का नहीं, दाहिनी ओर बढ़ने का उल्लेख है। तीसरी — दही, शहद, घी, दूब, कुशा और जौ जैसी जो चीज़ें आज भी गृह प्रवेश की थाली में रखी जाती हैं, वे इसी तरह की प्राचीन विधियों से आई लगती हैं।
वास्तु शांति अलग क्यों है: अग्नि पुराण के अध्याय 93 में भूमि के अधिष्ठाता देवता — वास्तुपुरुष — की पूजा का विस्तृत विधान है: उसका ध्यान, शरीर के अंगों की दिशाएँ और अलग-अलग देवताओं के लिए अलग-अलग अर्पण (अनुवाद: N. Gangadharan, साभार: wisdomlib.org)। इतनी लंबी विधि के लिए जानकार पुरोहित की मदद लेना समझदारी है। पर इस अध्याय में गृह प्रवेश की अलग विधि मुझे नहीं मिली — सादा गृह प्रवेश और पूरी वास्तु शांति दो अलग चीज़ें हैं।
गृह प्रवेश पूजा सामग्री लिस्ट
| सामग्री | किसलिए |
|---|---|
| तांबे या पीतल का कलश, जल, आम के 5 पत्ते, नारियल, मौली | कलश स्थापना और प्रवेश के समय हाथ में |
| गणेश जी का चित्र या मूर्ति, लाल या पीला कपड़ा, लकड़ी की चौकी | पूजा का स्थान |
| चावल (अक्षत), हल्दी, कुमकुम या रोली, पान, सुपारी | पूजन |
| घी, घी का दीपक, रुई की बत्ती, अगरबत्ती, माचिस | दीपक और आरती |
| दही, शहद, दूब, कुशा, जौ | जल छिड़काव — पारस्कर गृह्यसूत्र 3.4.9 में इनका उल्लेख है |
| आम के पत्तों और गेंदे का तोरण, रंगोली के रंग या फूल | द्वार की सजावट |
| दूध, चावल, चीनी या गुड़ (खीर के लिए), नया बर्तन | पहली रसोई |
| हवन कुंड, आम की लकड़ी, हवन सामग्री (ऐच्छिक) | छोटा हवन |
| मिठाई, फल | भोग और प्रसाद |
पूरी लिस्ट न जुटे तो चिंता न करें — जल, दीपक, कुछ फूल और मन की श्रद्धा से भी गृह प्रवेश हो सकता है। पहनावे के लिए धुले हुए नए या पारंपरिक कपड़े — साड़ी, सूट या कुर्ता — घरों की आम रीत है।
गृह प्रवेश कब करना चाहिए — और बिना मुहूर्त के?
Wikipedia के अनुसार गृह प्रवेश का मुहूर्त आम तौर पर ज्योतिषी या पुरोहित से पूछकर तय किया जाता है। पारस्कर गृह्यसूत्र (3.4.2) घर बनाने का काम भी "शुभ दिन" पर शुरू करने को कहता है। यानी शुभ समय देखना परंपरा का हिस्सा है।
पर अगर मुहूर्त निकलवाना संभव न हो — किराए का घर, नौकरी के कारण अचानक शिफ़्टिंग, या भारत से बाहर का शहर — तो बहुत-से परिवार किसी भी शुभ माने जाने वाले दिन की सुबह सादा गृह प्रवेश कर लेते हैं। बिना मुहूर्त के गृह प्रवेश करने पर किसी दोष का वचन मुझे इन ग्रंथों में नहीं मिला। भारत से बाहर हैं तो याद रखें कि तिथि और समय आपके शहर के हिसाब से बदलते हैं — इसके लिए हमारा लेख भारत से बाहर त्योहार की तारीख़ अलग क्यों देखें।
बिना पंडित के गृह प्रवेश पूजा विधि — क़दम दर क़दम
1. सफ़ाई और सजावट
एक दिन पहले पूरे घर की सफ़ाई कर लें। सुबह स्नान करके द्वार पर आम के पत्तों और गेंदे का तोरण लगाएँ और देहरी के आगे रंगोली बनाएँ।
2. कलश लेकर प्रवेश
घर की स्त्री जल से भरा कलश (ऊपर आम के पत्ते और नारियल) लेती है, और पति या परिवार का कोई सदस्य दीपक वाली थाली। द्वार पर रुककर भगवान का नाम लें, फिर दाहिनी ओर से भीतर प्रवेश करें। कई परिवार दाहिना पैर पहले रखते हैं — यह पारस्कर के "दाहिनी ओर बढ़ता हूँ" वाले वचन से मेल खाता है।
3. कलश स्थापना और गणेश पूजन
घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश, गणेश जी का चित्र और घी का दीपक रखें। हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें। पूजा-स्थान की दिशा पर विस्तार से हमारा लेख पूजा घर किस दिशा में होना चाहिए देखें।
4. पूरे घर में जल छिड़काव
एक कटोरी जल में थोड़ा दही, शहद, घी, दूब और जौ मिलाएँ — या केवल गंगाजल/साफ़ जल लें। आम के पत्तों से हर कमरे, रसोई और द्वार पर छिड़कें। पारस्कर गृह्यसूत्र (3.4.9) में भी इसी तरह के मिश्रण से आसनों और स्थानों पर छिड़काव का उल्लेख है।
5. छोटा हवन या दीपक
पारस्कर की विधि में अग्नि केंद्र में है। घर में अग्नि की अनुमति हो तो छोटे हवन कुंड में आम की लकड़ी जलाकर घी की आहुतियाँ दें — पूरी आसान विधि हमारे लेख बिना पंडित के हवन कैसे करें में है। फ़्लैट या किराए के घर में धुआँ और आग की अनुमति न हो, तो घी का एक दीपक ही अग्नि का प्रतीक है।
6. पहली रसोई — दूध उबालना
नए चूल्हे पर पहले दूध उबालें; कई परिवार दूध को जानबूझकर उफ़नने देते हैं। फिर उसी से खीर या मीठा बनाकर भगवान को भोग लगाएँ। इसका कारण अगले खंड में।
7. भोग, भोजन और प्रसाद बाँटना
पारस्कर की विधि भोजन कराने पर पूरी होती है (3.4.19)। आज के घरों में यह परिवार, मेहमानों और पड़ोसियों को प्रसाद बाँटने और साथ भोजन करने का रूप ले चुका है।
अब वह सवाल जो Google पर सबसे ज़्यादा पूछा जाता है — नए घर में दूध क्यों उबालते हैं? जवाब में ग्रंथ, परंपरा और पोंगल — तीनों जुड़ते हैं।
गृह प्रवेश में दूध क्यों उबालते हैं?
सीधा जवाब: नए घर की पहली रसोई में दूध उबालना और उसे उफ़नने देना समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है — "घर में दूध-धान ऐसे ही भरपूर रहे।" यह परंपरा है। पारस्कर गृह्यसूत्र के गृह प्रवेश वाले अंश में दूध उबालने का शब्दशः विधान मुझे नहीं मिला; पर उसमें नई अग्नि पर पका हुआ अन्न देवताओं को अर्पित करने का विधान है (3.4.8) — यानी नए घर में पहली बार कुछ पकाना और उसे भगवान को चढ़ाना अपने आप में एक पुरानी धार्मिक क्रिया है।
इसकी सबसे नज़दीकी मिसाल दक्षिण भारत का पोंगल है, जहाँ दूध और चावल के उफ़ान को आशीर्वाद माना जाता है, और उफ़ान आते ही लोग "पोंगलो पोंगल" — "यह उफ़न जाए" — पुकारते हैं (साभार: Wikipedia, Pongal)। नए घर की पहली रसोई का उफ़ान भी उसी भाव का है।
- किस दिशा में उफ़ने: कुछ परिवार मानते हैं कि दूध पूर्व दिशा की ओर गिरे तो शुभ। इसका ग्रंथ-वचन मुझे नहीं मिला — यह घर की रीत है।
- इंडक्शन या बिजली का चूल्हा: भारत से बाहर ज़्यादातर अपार्टमेंट में गैस नहीं होती — बिजली के चूल्हे पर दूध उबालना बिल्कुल ठीक है; रस्म का भाव बर्तन और चूल्हे के प्रकार पर नहीं टिका।
- उफ़ने दूध का क्या करें: बचा दूध खीर में लें और प्रसाद के रूप में बाँटें; दूध फेंकने की ज़रूरत नहीं।
गृह प्रवेश में क्या देना चाहिए? — मेहमानों के उपहार
उपहारों की कोई तय सूची ग्रंथों में मुझे नहीं मिली। घरों में जो चीज़ें आम तौर पर दी जाती हैं, उनके पीछे एक ही भाव है — नए घर में शुभता और ज़रूरत की चीज़ें:
- तुलसी का पौधा — घर में पूजा और हरियाली दोनों (तुलसी की देखभाल पर हमारा लेख तुलसी में जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए)।
- पीतल के दीपक या पूजा की थाली।
- रसोई के बर्तन — स्टील या पीतल के डिब्बे, कड़ाही।
- मिठाई और सूखे मेवे।
- भगवान का चित्र या छोटी मूर्ति।
दिलचस्प यह है कि नए घर में प्रवेश की रस्में दुनिया भर में हैं। Wikipedia के अनुसार भारत में कुछ जगह गाय को सबसे पहले घर में प्रवेश कराया जाता है — और पारस्कर के प्रवेश-वचन में भी "पशुओं के साथ" प्रवेश की बात है। रूस और जर्मनी में नए घर में रोटी और नमक उपहार में देने का चलन रहा है, और रूस में बिल्ली को पहले घर में छोड़ने की रीत है (साभार: Wikipedia, Housewarming party)।
किराए के घर में गृह प्रवेश कैसे करें?
किराए के घर में भी गृह प्रवेश करना या न करना पूरी तरह परिवार की इच्छा है — इसकी अनिवार्यता का वचन मुझे इन ग्रंथों में नहीं मिला। जो करना चाहें, उनके लिए छोटा तरीक़ा:
- सफ़ाई के बाद कलश और दीपक लेकर प्रवेश।
- उत्तर-पूर्व कोने में गणेश जी और कलश; छोटा पूजन।
- आम के पत्तों से जल छिड़काव।
- दूध उबालकर खीर या मीठे का भोग।
- पड़ोसियों को प्रसाद।
दीवारों पर कील या स्थायी निशान से बचें — तोरण को टेप या हुक से लगाएँ, ताकि घर छोड़ते समय मकान-मालिक से विवाद न हो।
क्या गृह प्रवेश से पहले नए घर में सो सकते हैं? सामान शिफ़्ट करने के बाद पूजा हो सकती है?
कई परिवारों में मान्यता है कि गृह प्रवेश से पहले नए घर में रात न बिताएँ। पर ऐसा कोई वचन मुझे पारस्कर गृह्यसूत्र या अग्नि पुराण के इन अध्यायों में नहीं मिला। व्यावहारिक सच यह है कि भारत से बाहर अक्सर पुराने घर की लीज़ ख़त्म होते ही नए में रहना पड़ता है। ऐसे में पहले दिन कम से कम दीपक जलाकर भगवान का नाम लें, और पूरा गृह प्रवेश सुविधा के पहले शुभ दिन कर लें। सामान शिफ़्ट होने के बाद पूजा करने में कोई बाधा नहीं — बस पूजा का कोना साफ़ और ख़ाली रखें।
भारत से बाहर गृह प्रवेश — smoke alarm, लीज़ और पड़ोसी
- लीज़ और सोसाइटी के नियम पढ़ें: कई अपार्टमेंट में खुली आग, हवन या बालकनी में अग्नि मना होती है। पहले देख लें।
- Smoke alarm: हवन या अगरबत्ती के धुएँ से अलार्म बज सकता है। खिड़कियाँ खोलें, धुआँ कम रखें, और अलार्म की बैटरी कभी न निकालें — यह आपकी सुरक्षा के लिए है।
- दीपक की सुरक्षा: Los Angeles फ़ायर डिपार्टमेंट की सलाह है कि मोमबत्ती या दीपक को जलने वाली चीज़ों से कम से कम 12 इंच दूर रखें, कभी अकेला न छोड़ें, कमरा छोड़ने या सोने से पहले बुझा दें, और बच्चों-पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें (साभार: LAFD, Candle Safety)।
- बिजली का दीपक: जहाँ आग मना हो, वहाँ LED दीपक के साथ पूजा करें; भाव वही रहता है।
- पड़ोसियों से परिचय: प्रसाद की मिठाई लेकर पड़ोसियों के घर जाएँ — नए घर में यह सबसे अच्छी शुरुआत है।
घर पर नियमित पूजा कैसे चलाएँ, इस पर हमारा लेख घर पर पूजा कैसे करें, जब पास में मंदिर न हो काम आएगा।
मिला क्या, नहीं मिला क्या
| बात | नतीजा |
|---|---|
| गृहस्थ स्वयं आहुति देकर घर में प्रवेश करता है | मिला — पारस्कर गृह्यसूत्र 3.4.5–8 |
| "दाहिनी ओर, सौभाग्य की ओर बढ़ता हूँ" — प्रवेश का वचन | मिला — 3.4.6 |
| दही, शहद, घी, दूब, कुशा, जौ से छिड़काव | मिला — 3.4.9 |
| प्रवेश के बाद भोजन कराना | मिला — 3.4.19 |
| वास्तुपुरुष की पूजा | मिला — अग्नि पुराण अध्याय 93 |
| गृह प्रवेश के तीन प्रकार | मिला — Wikipedia (वास्तु शास्त्र के हवाले से) |
| "दाहिना पैर पहले" — शब्दशः | नहीं मिला; केवल "दाहिनी ओर बढ़ना" |
| दूध उबालने का शब्दशः विधान | नहीं मिला; पका अन्न अर्पण का विधान मिला |
| बिना पंडित या बिना मुहूर्त के दोष | नहीं मिला |
| गृह प्रवेश से पहले घर में न सोने का नियम | नहीं मिला — परंपरा |
निचोड़: गृह प्रवेश के लिए पंडित न मिले, तो रुकने की ज़रूरत नहीं। पारस्कर गृह्यसूत्र की विधि में आहुति और प्रवेश घर का गृहस्थ स्वयं करता है। कलश लेकर दाहिनी ओर से प्रवेश, ईशान कोण में गणेश पूजन, जल छिड़काव, छोटा हवन या दीपक, दूध का उफ़ान और प्रसाद बाँटना — इतना आप अपने परिवार के साथ घर पर कर सकती हैं। पूरी वास्तु शांति करनी हो, तो उसके लिए जानकार पुरोहित की मदद लें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दिए शास्त्र-संदर्भ प्रामाणिक अनुवादों से मिलाए गए हैं, और परंपराएँ परिवार व क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं — अपने घर के बड़ों या पुरोहित की रीत को प्राथमिकता दें। लेख के सभी चित्र केवल विषय समझाने के लिए AI से बनाए गए हैं; ये किसी असली व्यक्ति, स्थान या घटना की तस्वीर नहीं हैं। यह किसी तरह की चिकित्सा, क़ानूनी या ज्योतिषीय सलाह नहीं है। दीपक, हवन या अग्नि से पहले अपने घर या किराए के नियम और स्थानीय अग्नि-सुरक्षा नियम देख लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिना पंडित के गृह प्रवेश कैसे करें?
गृह प्रवेश पूजा सामग्री लिस्ट क्या है?
गृह प्रवेश में दूध क्यों उबालते हैं?
गृह प्रवेश में क्या देना चाहिए?
किराए के घर में गृह प्रवेश कैसे करें?
बिना मुहूर्त के गृह प्रवेश कैसे करें?
क्या गृह प्रवेश से पहले नए घर में सो सकते हैं?
गृह प्रवेश में दाहिना पैर पहले क्यों रखते हैं?
संदर्भ के लिए उपयोग किए गए स्रोत — पारस्कर गृह्यसूत्र 3.4 (The Grihya Sutras, Part 1, SBE 29, अनुवाद: Hermann Oldenberg, साभार: sacred-texts.com); अग्नि पुराण, अध्याय 93 वास्तुपूजा (अनुवाद: N. Gangadharan, साभार: wisdomlib.org); गृह प्रवेश के प्रकार और मुहूर्त: Wikipedia (Grihapravesha); गाय का पहले प्रवेश, रूस-जर्मनी की रीतें: Wikipedia (Housewarming party); पोंगल का उफ़ान: Wikipedia (Pongal); दीपक की सुरक्षा: Los Angeles Fire Department (Candle Safety)। तीन बातें साफ़ कह देना ज़रूरी है। पहली — "दाहिना पैर पहले" शब्दशः, दूध उबालने का विधान, बिना पंडित या बिना मुहूर्त के दोष, और गृह प्रवेश से पहले घर में न सोने का नियम इन ग्रंथों में मुझे नहीं मिले; यह खोज का नतीजा है, अंतिम निर्णय नहीं। दूसरी — हर परिवार और क्षेत्र की रीत अलग है; अपने बड़ों की रीत को प्राथमिकता दें। तीसरी — पूरी वास्तु शांति एक अलग अनुष्ठान है; उसके लिए जानकार पुरोहित की मदद लें। किसी ब्रांड या दुकान की सिफ़ारिश नहीं।