- मंदिर खुलता है: रोज़ सुबह 2:30 बजे; बंद रात 11 बजे।
- सामान्य दर्शन: निःशुल्क, सुबह 4 बजे से (बीच में आरतियों के समय रुकते हैं)।
- सुगम दर्शन: 300 रुपये प्रति व्यक्ति, मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट से बुकिंग; 12 साल से छोटे बच्चों को टिकट नहीं।
- मोबाइल, पेन, कोई इलेक्ट्रॉनिक सामान: अंदर नहीं जाता। निःशुल्क लॉकर हैं।
- मंगला आरती: सुबह 3 से 4 बजे, टिकट से, प्रवेश केवल गेट नंबर 1 से।
- कपड़े: कोई तय ड्रेस कोड नहीं, शालीन कपड़ों की सलाह है।
काशी विश्वनाथ के दर्शन कितने बजे से कितने बजे तक होते हैं?
मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट पर दिनभर का क्रम यह लिखा है:
| क्या | समय |
|---|---|
| मंदिर खुलना | सुबह 2:30 बजे |
| मंगला आरती | सुबह 3 से 4 बजे (टिकट वालों के लिए) |
| सामान्य दर्शन | सुबह 4 से 11 बजे |
| भोग आरती (मध्याह्न) | 11:30 से 12 बजे |
| सामान्य दर्शन | दोपहर 12 से शाम 7 बजे |
| सप्तर्षि आरती | शाम 7 से 8:30 बजे |
| दर्शन फिर से | सप्तर्षि आरती के बाद रात 9 बजे तक |
| श्रृंगार/भोग आरती | रात 9 बजे से |
| शयन आरती | रात 10:30 बजे से; मंदिर 11 बजे बंद |
ट्रस्ट की ही अक्सर पूछे जाने वाले सवालों वाली सूची में दोपहर के दर्शन 12:20 से और रात के दर्शन 8:30 से 9 बजे तक लिखे हैं। यानी मिनटों का थोड़ा फ़र्क़ है। सावन, महाशिवरात्रि और बड़े पर्वों पर समय बदल भी जाता है। इसलिए जाने से एक दिन पहले मंदिर ट्रस्ट का आधिकारिक पन्ना एक बार ज़रूर देख लें।
समय तो वेबसाइट पर भी लिखा है। जो वहाँ नहीं लिखा, वह है लाइन में खड़े होकर पता चलने वाली बातें। वे आगे हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कैसे करें? क़दम-दर-क़दम
- पहले तय करें, सामान्य दर्शन या सुगम दर्शन। सामान्य दर्शन निःशुल्क हैं। सुगम दर्शन का टिकट 300 रुपये का है और मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट से पहले बुक होता है। उसी दिन का टिकट केवल हेल्पडेस्क काउंटर पर मिलता है, और आरती के समय व ख़ास पर्वों पर सुगम दर्शन नहीं होते।
- मोबाइल, पर्स का इलेक्ट्रॉनिक सामान और पेन पहले ही जमा कर दें। नीचे लॉकर वाला हिस्सा देखिए।
- जूते-चप्पल मंदिर के बाहर बने स्टैंड पर रखें। यह भी निःशुल्क है।
- लाइन में लगें। सुरक्षा जाँच कड़ी है, और हर दर्शनार्थी को मंदिर प्रशासन के नियमों के हिसाब से ही चलना होता है। बहस करने से समय ही ख़राब होता है।
- गर्भगृह के सामने लाइन चलती रहती है। रुककर लंबी पूजा का मौक़ा नहीं मिलता, इसलिए जो मन में माँगना है, पहले से सोचकर जाएँ।
- बाहर निकलकर कॉरिडोर, गंगा घाट और आसपास के मंदिर आराम से देखें।
मेरा सुगम दर्शन का अनुभव
सुगम दर्शन का टिकट मैंने घर बैठे ऑनलाइन बुक किया था। टिकट का प्रिंट-आउट और पहचान पत्र साथ ले गया। गेट नंबर 4 पर टिकट स्कैन हुआ और वहीं से अंदर जाने दिया गया। लगभग 45 मिनट में दर्शन हो गए। ये 45 मिनट भी इसलिए लगे कि इसी गेट से वीआईपी लोग भी दर्शन को आते हैं, और उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस ने सुगम दर्शन वाली लाइन को कुछ देर के लिए रोक दिया था।
एक बात साफ़ बता दूँ, ताकि वहाँ जाकर निराशा न हो। सुगम दर्शन में भी लाइन लगती है, और कई बार लंबी। मैंने देखा कि सब लोग अपनी-अपनी लाइन में चलते हुए ही दर्शन करते हैं। गिने-चुने लोग ही किसी पुरोहित के साथ जाते दिखे। कुल मिलाकर व्यवस्था सबके लिए लगभग एक जैसी है, चाहे सामान्य दर्शन हो या सुगम। अलग व्यवस्था मंत्रियों, न्यायाधीशों और उन बड़े पदाधिकारियों के लिए है जिनकी सुरक्षा ज़रूरी होती है।
काशी विश्वनाथ दर्शन में कितना समय लगता है?
यह दिन और भीड़ पर टिका है। मेरे तीनों अनुभव:
- सामान्य दिन, सामान्य लाइन: लगभग एक घंटा।
- सोमवार, सामान्य लाइन: एक घंटे से काफ़ी ज़्यादा। सोमवार शिव का दिन है, इसलिए भीड़ अपने-आप बढ़ जाती है।
- सुगम दर्शन: करीब 45 मिनट, जिसमें वीआईपी आवाजाही की वजह से रुकना भी शामिल था।
सावन के सोमवार, महाशिवरात्रि और छुट्टियों में यह समय कई गुना हो सकता है। पहली बार जा रहे हों तो किसी आम दिन, सुबह जल्दी जाना सबसे आसान रहता है।
काशी विश्वनाथ में मोबाइल ले जा सकते हैं या नहीं?
नहीं। मंदिर ट्रस्ट की सूचना के अनुसार मोबाइल, कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान, यहाँ तक कि पेन भी मंदिर परिसर के भीतर नहीं ले जा सकते। ट्रस्ट ने मंदिर चौक, यात्री सुविधा केंद्रों और हेल्पडेस्क पर निःशुल्क लॉकर बनाए हैं।
गलियों में एक और व्यवस्था दिखती है, जो मैंने हर बार इस्तेमाल की। प्रसाद और पूजा-सामग्री बेचने वाले कई दुकानदार अपनी दुकान पर निजी लॉकर रखते हैं। वे मोबाइल और सामान लॉकर में रखवाकर चाबी आपको दे देते हैं और इसके पैसे नहीं लेते। बदले में प्रसाद उन्हीं से ख़रीदना होता है। मैंने हर बार अपना मोबाइल ऐसे ही लॉकर में रखा और प्रसाद भी वहीं से लिया।
दोनों में से कोई भी चुनें, बस चाबी या टोकन संभालकर रखें और दुकान का नाम-निशान याद कर लें, क्योंकि गलियाँ एक जैसी दिखती हैं।
बुज़ुर्गों और चलने में दिक़्क़त वालों के लिए
ट्रस्ट अपने सुगम दर्शन को उन लोगों के लिए भी बताता है जो दिव्यांग हैं या किसी कारण से लंबी लाइन में खड़े नहीं हो सकते। व्हीलचेयर से दर्शन की व्यवस्था भी मैंने देखी, पर गेट नंबर 4 के पास व्हीलचेयर निजी लोग उपलब्ध कराते हैं, ट्रस्ट नहीं। बाक़ी किसी सुविधा के लिए गेट नंबर 4 के पास वाले हेल्पडेस्क पर पूछ लें।
अब वह सवाल जो Google पर सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, और जिसका जवाब हर कोई अलग देता है।
काशी में सबसे पहले किसके दर्शन करने चाहिए?
बहुत से लोग कहते हैं कि पहले काल भैरव के दर्शन करो, क्योंकि वे काशी के कोतवाल हैं। मैंने यह बात स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुवाद में ढूँढी।
“You will be the sole one to admonish and chastise those who commit sins here.”
— स्कंद पुराण, काशी खंड (पूर्वार्ध), अध्याय 31, श्लोक 47, अनुवाद: जी. वी. तगारे (साभार: wisdomlib.org)इसी अध्याय में काल भैरव को काशी में पाप करने वालों को दंड देने वाला और रक्षक बताया गया है। श्लोक 149 कहता है कि जो विश्वेश्वर के भक्त हैं पर काल भैरव के भक्त नहीं, उन्हें काशी में पग-पग पर बाधा आती है। यानी काल भैरव की पूजा ज़रूरी बताई गई है, पर पहले किसके दर्शन हों, यह क्रम इस अध्याय में मुझे नहीं मिला।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की Incredible India साइट तो लिखती है कि काशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव जाने की रीत है। इसलिए दोनों तरह की परंपरा चलती है। मेरी सलाह इतनी ही है: काशी जाएँ तो काल भैरव के दर्शन ज़रूर करें, पहले या बाद में, जैसी आपके घर की रीत हो।
काशी विश्वनाथ में क्या-क्या देखने का है?
- काशी विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर): मंदिर से सीधे गंगा तक जाता चौड़ा परिसर। गंगा की ओर वाले द्वार की सीढ़ियाँ ऊपर hero फ़ोटो में हैं।
- अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा: धाम के भीतर, उन्हीं रानी की जिन्होंने आज का मंदिर बनवाया।
- गंगा घाट: ललिता घाट, जलासेन घाट और मणिकर्णिका घाट धाम से जुड़े हैं।
- धाम की सुविधाएँ: धार्मिक किताबों की दुकान, शौचालय, अतिथि गृह और बिना प्याज़-लहसुन वाला भोजनालय भी परिसर में मैंने देखा।
- काल भैरव मंदिर और अन्नपूर्णा देवी के दर्शन भी लोग इसी यात्रा में करते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर की कहानी क्या है?
शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में काशी को शिव की सबसे प्रिय नगरी कहा गया है। अध्याय 22 के अनुसार प्रलय के समय भी काशी शिव के त्रिशूल पर टिकी रहती है, और यहाँ का अविमुक्त लिंग स्वयं शिव ने स्थापित किया।
“The phallic image Avimukta is installed by the great Śiva himself.”
— शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 22, श्लोक 21, अनुवाद: जे. एल. शास्त्री (साभार: wisdomlib.org)उसी अध्याय में आता है कि भक्तों के कल्याण के लिए शिव से काशी में ही रहने की प्रार्थना की गई और वे यहीं बस गए। अगले अध्याय 23 में विश्वेश्वर को ज्योतिर्लिंग के रूप में बताया गया है। इसीलिए काशी विश्वनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में गिने जाते हैं, और काशी को "अविमुक्त क्षेत्र" यानी वह जगह कहा जाता है जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते।
काशी विश्वनाथ मंदिर किसने बनवाया?
- आज का मंदिर 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया।
- 1835 में महाराजा रणजीत सिंह ने लगभग एक टन सोना दान किया, जिससे शिखर मढ़े गए। इसीलिए इसे "स्वर्ण मंदिर" भी कहा जाता है। (कुछ जगह 1839 लिखा मिलता है; Wikipedia 1835 बताता है।)
- इससे पहले के मंदिर कई बार तोड़े गए। इतिहास में 1194, लगभग 1490 के दशक और 1669 की घटनाएँ दर्ज हैं। 1669 में औरंगज़ेब के आदेश पर मंदिर गिराया गया था।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर
भारत सरकार की पत्रिका न्यू इंडिया समाचार के अनुसार 13 दिसंबर 2021 को काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन हुआ। पहले मंदिर परिसर लगभग 3,000 वर्ग फ़ुट का था, अब यह 5 लाख 27 हज़ार वर्ग फ़ुट से बड़ा है। इसके लिए 300 से ज़्यादा भवन ख़रीदे गए, और उन्हें हटाने पर कंक्रीट और प्लास्टर के नीचे दबे 40 से ज़्यादा प्राचीन मंदिर निकले, जिन्हें फिर से सँवारा गया (साभार: न्यू इंडिया समाचार, PIB)।
मैंने कॉरिडोर से पहले की संकरी गलियाँ भी देखी हैं और बाद का खुला परिसर भी। सबसे बड़ा फ़र्क़ यही लगा कि अब गंगा घाट से सीधे मंदिर तक पहुँच सकते हैं, और भीड़ को खड़े होने की जगह मिल गई है।
काशी, बनारस और वाराणसी में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं, तीनों एक ही शहर के नाम हैं। काशी सबसे पुराना नाम है, जिसका अर्थ "प्रकाशित होने वाली" माना जाता है। वाराणसी नाम वरुणा और असी नदियों के बीच बसे होने से जुड़ा माना जाता है। बनारस बोलचाल का नाम है।
उत्तरकाशी का विश्वनाथ मंदिर अलग है
खोजने पर उत्तराखंड के उत्तरकाशी का विश्वनाथ मंदिर भी दिखता है। वह भागीरथी किनारे, ऋषिकेश से गंगोत्री जाने वाले रास्ते पर है। बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाने वाला काशी विश्वनाथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में है। यात्रा की योजना बनाते समय दोनों को मिलाएँ नहीं।
पहली बार जा रहे हैं? मेरी दो सलाह
- जाने से पहले मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर लिखी सारी जानकारी पढ़ लें। समय, टिकट, बंद रहने वाले दिन और नियम वहीं से देखें, ताकि ऐन वक़्त पर दिक़्क़त न हो।
- सुगम दर्शन को "बिना लाइन वाला" मानकर न जाएँ। वह लाइन को छोटा करता है, ख़त्म नहीं। समय लेकर जाएँ और सुरक्षा वालों के निर्देश मानें।
काशी को जल्दी में देखने से उसका असली रूप नहीं दिखता। दर्शन के बाद घंटे-आधे घंटे के लिए गंगा किनारे बैठिए। मुझे हर बार वहीं लगा कि यात्रा सचमुच पूरी हुई। शिव-पूजा से जुड़े हमारे लेख सोमवार व्रत की विधि और प्रदोष व्रत भी काम आएँगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
काशी विश्वनाथ में सुगम दर्शन क्या है और कितने का है?
काशी विश्वनाथ मंदिर में मोबाइल ले जा सकते हैं क्या?
काशी विश्वनाथ दर्शन में कितना समय लगता है?
काशी में सबसे पहले किसके दर्शन करने चाहिए?
काशी विश्वनाथ मंदिर किसने बनवाया था?
अस्वीकरण एवं स्रोत: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की आधिकारिक वेबसाइट (मंदिर की रीतियाँ, सुगम दर्शन का पन्ना और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की सूची); शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता 22–23, अनुवाद जे. एल. शास्त्री और स्कंद पुराण, काशी खंड 31, अनुवाद जी. वी. तगारे (साभार: wisdomlib.org); Incredible India (पर्यटन मंत्रालय); न्यू इंडिया समाचार, जनवरी 2022 (PIB); इतिहास की तिथियाँ Wikipedia से। दर्शन का अनुभव लेखक का अपना है। समय और नियम बदल सकते हैं, इसलिए जाने से पहले मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट देख लें। यह लेख केवल शैक्षणिक (educational) उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।
इस लेख में जिन चित्रों के नीचे 'फ़ोटो: धनपत सिंह' लिखा है, वे असली फ़ोटो हैं।